शाखा मुख्यशिक्षक : व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण !
शाखा मुख्यशिक्षक यह शब्द संघ के स्वयं सेवकों को एकदम से समझ में आयेगा। मेरे जीवन में जितने भी दायित्व रहे उसमें सबसे अच्छा दायित्व मुख्य शिक्षक का ही है । पहले गटनायक बनाया फिर गणशिक्षक फिर नयी जगह शाखा लगाना और पहले बिना ध्वज की शाखा लगाना फिर शाखा को ध्वज मिले इसके लिये लोगो को प्रार्थना याद कराना,गणवेष बनवाना,तीन गण तक बने यह चिंता करना। सच में शाखा का मुख्य शिक्षक बनना मतलब एक साम्राज्य खड़ा करने जैसा । यही संघ हैं जो अपने स्वयंसेवकों को एक साम्राज्य खड़ा करने का अवसर देता हैं। *स्वयंसेवक* स्वयंसेवक होने से बढ़कर गर्व और सम्मान की दूसरी बात हमारे लिए कोई नहीं है। जब हम कहते हैं कि मैं एक साधारण स्वयंसेवक हूँ, तब इस दायित्व का बोध हमें अपने हदय में रखना चाहिए कि यह दायित्व बहुत बड़ा है। समाज भी हमारी ओर देख रहा है और समाज हमें एक स्वयंसेवक के रूप में देखता है। समाज की हमसे बड़ी-बड़ी अपेक्षाएँ रहें और उन अपेक्षाओं को पूर्ण करते हुए हम उनसे भी अधिक अच्छे प्रमाणित हों। शाखा के विषय में नित्य करणीय बातें संघ-शाखा के विषय में ध्यान रखें कि हमारी शा...



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