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💞🕉🚩 मंदिर स्वच्छता सेवा : हम संकल्पित हैं की पूरे देश में घूम घूम कर हिन्दुओं में यही भावना जगायेंगे, अपने धर्म, संस्कार, संस्कृति पर जागरण करेंगे और गर्व करेंगे !

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  हम संकल्पित हैं की पूरे देश में घूम घूम कर हिन्दुओं में यही भावना जगायेंगे, अपने धर्म, संस्कार, संस्कृति पर जागरण करेंगे और गर्व  करेंगे !  " 💞🕉🚩 मंदिर स्वच्छता सेवा 💐🙏",  जहां सफाई और स्वच्छता होती है वहां ईश्वर का वास होता है। स्वच्छ और प्रदूषण रहित वातावरण में ही ईश्वर की पूजा और उन्हें याद करने का कार्य संभव है। ऐसे में स्वच्छ भारत अभियान के तहत यह सबकी जिम्मेवारी है कि मंदिर परिसरों & पूजा स्थल के आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखें। 💐🙏 स्वच्छ भारत एक ‘जन-आंदोलन’ का रूप ले चुका है क्योंकि इसे जनता का अपार समर्थन मिला है। बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी आगे आकर साफ-सुथरा भारत बनाने का प्रण किया है। स्वच्छ भारत अभियान के आरंभ के बाद गलियों की सफाई के लिए झाड़ू उठाना, कूड़े-करकट की सफाई, स्वच्छता पर ध्यान केन्द्रित करना और अपने चारों ओर स्वास्थ्यवर्धक वातावरण बनाना अब जनता की प्रकृति बन गई है। जनता ‘स्वच्छता ईश्वरत्व के निकट है’ के संदेश को फैलाने में मदद दे रही है और इस काम में शामिल हो रही है।  💞🕉🚩🇮🇳 हर सन्त कहे हर साधु कहे  सच और साहस है ज...

🙏💐 गटनायक , स्वयंसेवकों के समूह का नायक है, शाखा में स्वयंसेवकों की उपस्थिति से लेकर अपने कार्य क्षेत्र में समाज जागरण समाज परिवर्तन का वह माध्यम है !

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🙏💐 गटनायक , स्वयंसेवकों के एक समूह का नायक है. वह स्वयंसेवकों के समूह का सूचना तंत्र का प्रमुख अंग है. शाखा में स्वयंसेवकों की उपस्थिति से लेकर अपने कार्य क्षेत्र में समाज जागरण समाज परिवर्तन का वह माध्यम है. स्वयंसेवक के अनुशासित, ईमानदार आचरण से अन्य समाज भी प्रेरणा लेता है ! घ. गट नायक :- गट का प्रमुख ।अपने  वस्ती , गली(क्षेत्र) में नेतृत्व प्रदान करने वाला। अपने गट के स्वयंसेवकों व उनके परिजनों तथा अन्य नए बंधुओं से संपर्क-संवाद स्थापित करना तथा उनको  शाखा पर लाना व उनके सुख-दुःख में सहभागी होना।क्षेत्र के प्रत्येक घर से संपर्क तथा प्रत्येक घर से स्वयंसेवक बनाना गटनायक का मुख्य कार्य है। संघ के पहले गटनायक तीसरे सरसंघचालक मधुकर दत्तात्रय उपाख्य बालासाहेब देवरस थे। वे १९२५ में विजयादशमी के दिन स्थापित संघ के पहले ५ बाल स्वयंसेवकों में से एक थे। उल्लेखनीय है कि संघ की स्थापना १९२५ में विजयादशमी के दिन नागपुर के मोहिते के बाड़े में हुई थी। संघ निर्माता डॉ. हेडगेवार ने जिन ५ बाल स्वयंसेवकों के साथ संघ की पहली शाखा प्रारंभ की थी, उसमें बालासाहेब देवरस भी थे। डॉ. हेडगेवार ने ख...

रक्षाबंधन उत्सव ये समरसता और संकल्प का उत्सव है !

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नमस्कार,   सभी स्वयंसेवकों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।  रक्षाबंधन उत्सव ये समरसता का उत्सव है। हम सभी एक ही समाज के अंग है, हम सभी एक दूजे का हाथ पकड़कर आगे चलने के लिए कटिबद्ध है।  रक्षाबंधन उत्सव ये संकल्प है के हम अपने धर्म, राष्ट्र की रक्षा करने के लिए कटिबद्ध है और सभी समाज बंधुओ को आत्मीय भाव से एक दूजे के लिए अडिग स्तंभ के समान खड़ा रहेने का संदेश देता है। आज के परिस्थिति ने समाज के भिन्न भिन्न अंगो ने जो आगे आकर कार्य किया है ये हमारे रक्षाबंधन के अटूट बंधन का साक्षी है। इसी भाव से ओतप्रोत हम देश के प्रति अपनी निष्ठा समर्पित करते रहेंगे।  आपको और आपके परिवार को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🚩🚩🚩🚩 आपका, नगर सेवा प्रमुख  ( संतोषकुमार. बी. पांडेय ) रक्षा बंधन सन्देश : "इस भूमि में अति प्राचीन काल से सम्पूर्ण समाज को विराट पुरुष के रूप में हमारे सामने रखा गया . प्रत्येक व्यक्ति उस विराट शरीर का एक छोटा सा अंश है . मनुष्य का शरीर छोटी छोटी अगणित जीवपेशियों से बना है. उन अवयवों को एक सूत्र में परिचालित करने वाली एक चैतन्यशक्ति शरीर की अस्मिता है....