शाखा में दंड प्रयोग & दंड युद्ध : दंड प्रहार से चित्त की एकाग्रता और बनी रहती है स्फूर्ति !
महाराणा प्रताप की बाजुओं में इतना दम था कि उन्होंने तलवार के एक ही वार से बहलोल खान को जिरह-बख्तर, घोड़े सहित काट डाला। रानी दुर्गावती युद्ध के मैदान में घोड़े की लगाम मुँह में थाम कर दोनों हाथों में तलवार लेकर उतरी थीं और शत्रुओं को नाकों चने चबवा दिए। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी तलवार के बल पर आदिलशाही और मुगलशाही से टक्कर लेते हुए हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की थी। हम उन्हीं महान पूर्वजों के वंशज हैं। हमारी भुजाओं में वैसा ही बल चिर स्थाई रहे, हम क्षमतावान बने रहें, इसके लिए संघ ने कुछ वर्षों से अनूठा प्रयत्न प्रारंभ किया है:- प्रहार महायज्ञ 16.12.1971 को भारत की पराक्रमी सेना ने पाकिस्तान की सेना के 97,368 सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए विवश कर दिया था। इतिहास का यह एक बिरला ही उदाहरण है। इस गौरवशाली दिवस पर स्वयंसेवकों के बल और सामर्थ्य में वृद्धि तथा उनमें विजिगीषु वृत्ति उत्पन्न करने के उद्देश्य से संघ प्रतिवर्ष 16 दिसम्बर को प्रहार महायज्ञ का आयोजन करता है। आइए उस दिन अपनी शाखा पर दंड लेकर अधिकतम प्रहार लगाएँ और इस महायज्ञ में अपनी आहु...