हमारे डॉक्टरजी :- एक स्वप्न
🍃 👍🏼हमारे डॉक्टरजी
एक स्वप्न
डाक्टर हेडगेवार रात-दिन संघ का काम करने लगे।
सुबह-शाम, दिन में और रात में घर और बाहर, वे एकमात्र संघ का ही विचार करते थे। वे कभी स्वप्न देखते थे तो वह भी संघ के सम्बन्ध में ही होता था।
एक बार नागपुर की एक शाखा में स्वयंसेवकों के कुछ विवाद हुआ। परिणाम यह हुआ कि उनके छोटे-छोटे दो दल बन गये। एक दलने शाखा में आना बन्द कर दिया। दूसरा दल समझने लगा कि अपनी विजय हुई।
यह सब वृत्त सुनकर डाक्टरजी को बहुत दुख हुआ। वे दोनों दलों के प्रत्येक व्यक्ति से मिले। प्रत्येक को उन्होंने समझाया। प्रत्येक का मनोमालिन्य उन्होंने दूर किया। वे सब पूर्ववत् शाखा में आने लगे।
वह शाखा सुचारू रूप से चलने लगे।
इस घटना के पश्चात नागपुर के सब स्वयंसेवकों को एकत्रित कर डाक्टरजी ने उन्हें कहा, “प्रिय स्वयंसेवक बंधुओं !
इतिहास से सबक सीखना ही बुद्धिमानी का लक्षण है। छोटे से अहंकार को पालना, पोसना, बढाना,
व्यक्तिगत आकांक्षा रखना, अपने छोटे-छोटे गट बनाकर दलबन्दी करना,
जरासी बात पर आपस में लडना, इसी से हमारे देश की दुर्गति हुई है। इन सब दुर्गुणों को हमारे देश से उखाडकर फैंकने के लिए ही संघ का निर्माण हुआ है।
इसलिए यह निश्चतय करें कि चाहे जो हो जाये, हम आपस में कभी नहीं झगडेंगे।
मानों कुछ मतभेद हो गया; किसी ने किसी का कहा नहीं माना,
अथवा कोई छोटा-बडा कार्य दूसरे ढंग से किया गया,
तो उसके लिए नाराज होकर संघ में आना बन्द करना कहां तक उचित है?
संघ किसी छोटे-बडे व्यक्ति की निजी सम्पत्ति नहीं है।
संघ मेरा नहीं है, संघ हम सब लोगों का है। संघ समूचे समाज का है। संघ इस भारतवर्ष का है। हम इसे कैसे छोड सकते हैं?’’
👍🏼 भारत माता की जय 🌹🌷🕉⛳🌷🌹🙏🏼
संतोषकुमार भागीरथी पाण्डेय समय 3.48Am
एक स्वप्न
डाक्टर हेडगेवार रात-दिन संघ का काम करने लगे।
सुबह-शाम, दिन में और रात में घर और बाहर, वे एकमात्र संघ का ही विचार करते थे। वे कभी स्वप्न देखते थे तो वह भी संघ के सम्बन्ध में ही होता था।
एक बार नागपुर की एक शाखा में स्वयंसेवकों के कुछ विवाद हुआ। परिणाम यह हुआ कि उनके छोटे-छोटे दो दल बन गये। एक दलने शाखा में आना बन्द कर दिया। दूसरा दल समझने लगा कि अपनी विजय हुई।
यह सब वृत्त सुनकर डाक्टरजी को बहुत दुख हुआ। वे दोनों दलों के प्रत्येक व्यक्ति से मिले। प्रत्येक को उन्होंने समझाया। प्रत्येक का मनोमालिन्य उन्होंने दूर किया। वे सब पूर्ववत् शाखा में आने लगे।
वह शाखा सुचारू रूप से चलने लगे।
इस घटना के पश्चात नागपुर के सब स्वयंसेवकों को एकत्रित कर डाक्टरजी ने उन्हें कहा, “प्रिय स्वयंसेवक बंधुओं !
इतिहास से सबक सीखना ही बुद्धिमानी का लक्षण है। छोटे से अहंकार को पालना, पोसना, बढाना,
व्यक्तिगत आकांक्षा रखना, अपने छोटे-छोटे गट बनाकर दलबन्दी करना,
जरासी बात पर आपस में लडना, इसी से हमारे देश की दुर्गति हुई है। इन सब दुर्गुणों को हमारे देश से उखाडकर फैंकने के लिए ही संघ का निर्माण हुआ है।
इसलिए यह निश्चतय करें कि चाहे जो हो जाये, हम आपस में कभी नहीं झगडेंगे।
मानों कुछ मतभेद हो गया; किसी ने किसी का कहा नहीं माना,
अथवा कोई छोटा-बडा कार्य दूसरे ढंग से किया गया,
तो उसके लिए नाराज होकर संघ में आना बन्द करना कहां तक उचित है?
संघ किसी छोटे-बडे व्यक्ति की निजी सम्पत्ति नहीं है।
संघ मेरा नहीं है, संघ हम सब लोगों का है। संघ समूचे समाज का है। संघ इस भारतवर्ष का है। हम इसे कैसे छोड सकते हैं?’’
👍🏼 भारत माता की जय 🌹🌷🕉⛳🌷🌹🙏🏼
संतोषकुमार भागीरथी पाण्डेय समय 3.48Am

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