"अपने समाज में मनुष्य बल ,धन बल , बुद्धि बल , सब कुछ था परंतु मैं इस राष्ट्र का घटक हूं तथा इसके लिए मेरा जीवन लगना चाहिए या कर्तव्य भावना व्यक्ति के अंतकरण से स्पष्ट हो जाने के कारण सब प्रकार की शक्ति होते हुए भी हिंदू समाज पराभूत हुआ. इस सोचनीय अवस्था के निदान के रूप में समाज की नस नस में राष्ट्रीयता की उत्कट भावना को भरकर और इस भावना से प्रेरित होकर संपूर्ण समाज अनुशासित एवं संज्जीवित होकर पुनः दिग्विजय राष्ट्र के रूप में खड़ा हो, डॉक्टर जी के इस महामंगल संकल्प का मूर्त रूप है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ."


Santoshkumar B Pandey at 10.15am

Comments

Popular posts from this blog

शाखा मुख्यशिक्षक : व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण !

💞🕉🚩 मंदिर स्वच्छता सेवा : हम संकल्पित हैं की पूरे देश में घूम घूम कर हिन्दुओं में यही भावना जगायेंगे, अपने धर्म, संस्कार, संस्कृति पर जागरण करेंगे और गर्व करेंगे !

RSS - Shakha , Varshikotsava & Sangh festivals (Utsav's)